Room Freshener का इस्तेमाल कभी न करें – डॉक्टर बोले, इसमें छिपे हैं टॉक्सिक केमिकल्स जो बढ़ाते हैं रेस्पिरेटरी रिस्क
नई दिल्ली |
Room Freshener : घर या ऑफिस को महकाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला रूम फ्रेशनर (Room Freshener) अब सेहत के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
एक नई मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों की राय के अनुसार, ज्यादातर रूम फ्रेशनर्स में मौजूद टॉक्सिक केमिकल्स सांस संबंधी बीमारियों, एलर्जी, सिरदर्द, और यहां तक कि हार्मोनल असंतुलन का कारण बन सकते हैं।
डॉक्टरों की चेतावनी: “यह सिर्फ खुशबू नहीं, जहर भी है”
एम्स, दिल्ली के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. राजीव शर्मा का कहना है —
“रूम फ्रेशनर्स में बेंजीन, फॉर्मल्डिहाइड, और टॉल्यून जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।
जिन लोगों को पहले से एलर्जी या अस्थमा है, उनके लिए ये खासतौर पर खतरनाक साबित हो सकते हैं।”
डॉ. शर्मा के मुताबिक, “कृत्रिम सुगंध (Synthetic Fragrance) फेफड़ों में सूजन पैदा कर सकती है और लंबे समय तक एक्सपोज़र से क्रॉनिक रेस्पिरेटरी डिसऑर्डर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।”
कैसे असर डालते हैं ये केमिकल्स
विशेषज्ञों का कहना है कि जब रूम फ्रेशनर स्प्रे किया जाता है, तो उसमें मौजूद रासायनिक अणु हवा में मिलकर वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स (VOCs) बनाते हैं।
ये छोटे-छोटे कण नाक और श्वसन तंत्र से होते हुए सीधे फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं, जहां वे सूजन, खांसी और सांस की तकलीफ का कारण बनते हैं।
अमेरिकन लंग एसोसिएशन की एक स्टडी के मुताबिक, लगातार रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल करने वालों में अस्थमा और ब्रॉन्काइटिस के मामलों में 38% की वृद्धि दर्ज की गई।
रूम फ्रेशनर के अन्य हानिकारक प्रभाव
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सिरदर्द और माइग्रेन: सिंथेटिक फ्रेगरेंस में मौजूद बेंजीन और एल्डिहाइड कंपाउंड दिमाग की नसों को प्रभावित करते हैं।
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त्वचा पर असर: कई बार रूम फ्रेशनर के सीधे संपर्क से स्किन पर रैशेज और जलन की शिकायतें होती हैं।
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हार्मोनल असंतुलन: कुछ केमिकल्स शरीर में एस्ट्रोजन लेवल को प्रभावित कर सकते हैं।
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बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरनाक: कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों पर इसका असर और तेज़ होता है।
नेचुरल ऑप्शन क्या हैं?
डॉक्टरों का सुझाव है कि कमरे को महकाने के लिए नेचुरल या ऑर्गेनिक विकल्पों को अपनाया जाए।
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नींबू और दालचीनी के छिलकों को पानी में उबालकर स्प्रे करें।
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बेकिंग सोडा और लैवेंडर ऑयल का मिश्रण इस्तेमाल करें।
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इनडोर पौधे जैसे पीस लिली, एलोवेरा या मनी प्लांट कमरे की हवा को स्वच्छ रखने में मदद करते हैं।
डॉ. शर्मा कहते हैं —
“प्राकृतिक तरीके हमेशा सुरक्षित और सस्ते हैं।
हवा में खुशबू के लिए सेहत को दांव पर लगाना समझदारी नहीं है।”
सरकारी और मेडिकल गाइडलाइन
पर्यावरण मंत्रालय और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) दोनों ही यह मानते हैं कि रूम फ्रेशनर्स को नियमित उपयोग की वस्तु नहीं माना जाना चाहिए।
IMA ने अपने एडवाइजरी नोट में कहा है कि “कमरों में खुशबू के लिए कृत्रिम सुगंध का उपयोग सीमित करें और वेंटिलेशन बढ़ाएं।”
