March 26, 2026
CEC Gyanesh Kumar faces vote rigging allegations: अमित शाह के करीबी, कश्मीर पुनर्गठन विधेयक और राम जन्मभूमि ट्रस्ट से रहा जुड़ाव
जॉब - एजुकेशन दिल्ली

CEC Gyanesh Kumar faces vote rigging allegations: अमित शाह के करीबी, कश्मीर पुनर्गठन विधेयक और राम जन्मभूमि ट्रस्ट से रहा जुड़ाव

Nov 6, 2025

नई दिल्ली।

CEC Gyanesh Kumar faces vote rigging : देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर विपक्षी दलों ने वोट चोरी और पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोपों के बीच यह सवाल फिर उठने लगा है कि आखिर ज्ञानेश कुमार कौन हैं और उनका राजनीतिक सफर इतना विवादित क्यों माना जा रहा है।


कौन हैं ज्ञानेश कुमार?

ज्ञानेश कुमार 1983 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी हैं। उन्होंने केंद्र सरकार में कई अहम पदों पर काम किया है। गृह मंत्रालय में रहते हुए वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के काफी करीबी माने जाते थे।

उनकी प्रशासनिक छवि एक सख्त और फैसले लेने वाले अफसर की रही है। 2024 में उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया गया, जिसके बाद कई राजनीतिक दलों ने उनकी नियुक्ति पर सवाल खड़े किए।


कश्मीर पुनर्गठन विधेयक में निभाई अहम भूमिका

ज्ञानेश कुमार ने गृह मंत्रालय में रहते हुए जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक (2019) के मसौदे और अमल में प्रमुख भूमिका निभाई थी। इस विधेयक के बाद राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया था — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख। इस निर्णय ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई, लेकिन साथ ही विवादों में भी ला दिया।


राम जन्मभूमि ट्रस्ट से भी रहा नाता

सूत्रों के अनुसार, ज्ञानेश कुमार राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से भी परोक्ष रूप से जुड़े रहे हैं। वे प्रशासनिक स्तर पर अयोध्या के विकास और मंदिर निर्माण परियोजनाओं की निगरानी से संबंधित कई बैठकों में शामिल रहे।


वोट चोरी और पक्षपात के आरोप

हाल ही में कुछ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में मतदाता सूची में धांधली और ईवीएम की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। विपक्ष का दावा है कि सीईसी के रूप में उनका रुख सरकार-समर्थक रहा है।

हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को राजनीतिक प्रेरित और निराधार बताया है।


विवादों के बावजूद मजबूत प्रशासक की छवि

ज्ञानेश कुमार को एक कुशल एडमिनिस्ट्रेटर माना जाता है। उन्होंने कई बार कहा है कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता सर्वोच्च है और किसी भी राजनीतिक दबाव में निर्णय नहीं लिया जाता।