औरंगाबाद (बिहार)।
Stuck: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में कांग्रेस के लिए औरंगाबाद जिले की कुटुंबा सीट सबसे ज्यादा चुनौती भरी मानी जा रही है। दिलचस्प यह है कि जिस सीट पर राहुल गांधी ने प्रचार किया था, वहीं अब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम खुद मुश्किल में नजर आ रहे हैं।
2020 के चुनाव में इस सीट से कांग्रेस को जीत दिलाने वाले मनोज कुमार यादव इस बार विरोधी के रूप में सामने हैं। माना जा रहा है कि स्थानीय मतदाताओं में इस बार जातीय समीकरण और अंदरूनी नाराजगी का असर देखने को मिल सकता है।
2020 में कांग्रेस की जीत की कहानी
पिछले विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी की सभा ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में माहौल बनाया था। उस वक्त पार्टी के प्रत्याशी मनोज कुमार यादव ने बड़ी जीत दर्ज की थी। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं — मनोज यादव ने दल बदलकर दूसरी पार्टी का दामन थाम लिया है और उसी सीट से मुकाबले में हैं।
प्रदेश अध्यक्ष की प्रतिष्ठा दांव पर
राजेश राम के लिए यह चुनाव न सिर्फ एक सीट की लड़ाई है, बल्कि राजनीतिक साख का सवाल भी बन गया है। पार्टी के भीतर उन्हें प्रदेश स्तर पर नेतृत्व क्षमता दिखाने का मौका मिला है, लेकिन कुटुंबा में उनकी स्थिति डांवाडोल मानी जा रही है। स्थानीय कार्यकर्ता संगठन में असंतुलन और प्रचार रणनीति की कमी की बात कह रहे हैं।
राहुल गांधी का ठहराव बना चर्चा का केंद्र
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी का यहां ठहरना और सभा करना ‘सकारात्मक संदेश’ माना गया था, मगर ज़मीनी हकीकत कुछ और कह रही है। विरोधी दल इस सीट को कांग्रेस के “कमजोर किले” के तौर पर पेश कर रहे हैं।
राजनीतिक समीकरण
- कांग्रेस: राजेश राम (प्रदेश अध्यक्ष)
- विपक्षी: मनोज कुमार यादव (पूर्व कांग्रेस नेता)
- सीट का जातीय समीकरण: यादव, पासवान और भूमिहार मत निर्णायक भूमिका में
- कुल मतदाता: लगभग 2.8 लाख
स्थानीय मतदाताओं की राय
गांवों में चर्चा है कि “2020 में जिसने जिताया, वही अब हराने निकला है।” लोगों का कहना है कि विकास कार्यों और स्थानीय उपस्थिति को लेकर कांग्रेस प्रत्याशी पर सवाल हैं।
