Mexico’s Fatima Bosch Crowned Miss Universe : बेवकूफ कहे जाने पर सेरेमनी छोड़कर चली गई थीं; भारत की मणिका विश्वकर्मा टॉप-30 तक ही पहुंचीं
मेक्सिको की फातिमा बोश ने इस साल का Miss Universe खिताब जीतकर दुनिया को चौंका दिया। स्टेज पर ग्रेस, कॉन्फिडेंस और इंटेलिजेंस—तीनों का शानदार मिश्रण दिखाते हुए उन्होंने ज्यूरी पैनल का दिल जीत लिया। फातिमा की जीत सिर्फ एक ब्यूटी पेजेंट टाइटल नहीं है, बल्कि एक मजबूत संदेश भी है कि कभी-कभी आलोचनाओं से ही इंसान और चमककर निकलता है।
फातिमा बोश ने प्रतियोगिता से जुड़े एक बड़े विवाद का सामना किया था, जब रिहर्सल के दौरान उन्हें “बेवकूफ” कहकर कम आंका गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कमेंट सुनकर उन्होंने गुस्से और संताप में सेरेमनी छोड़ दी थी। लेकिन कुछ ही घंटों बाद जब उन्होंने फिर से स्टेज पर कदम रखा, तो पूरा माहौल बदल गया—उनके आत्मविश्वास और दृढ़ता ने जजों और दर्शकों दोनों को प्रभावित कर दिया।
स्टेज पर वॉक के दौरान फातिमा ने अपनी ट्रेडमार्क स्माइल और कंट्रोल्ड एलिगेंस से साबित किया कि वो सिर्फ ग्लैमर नहीं, बल्कि स्ट्रॉन्ग माइंडसेट की भी मिसाल हैं। कोरियोग्राफर्स का कहना था कि फातिमा में एक “rare aura” है जो बाकी कंटेस्टेंट्स से उन्हें अलग बनाती है।
भारत की मणिका विश्वकर्मा ने शानदार प्रदर्शन किया, पर टॉप-30 के आगे सफर नहीं बढ़ा
भारत की प्रतिनिधि मणिका विश्वकर्मा ने इस साल Miss Universe मंच पर अपनी शालीनता और व्यक्तित्व से खूब प्रभावित किया। उनके ट्रेडिशनल आउटफिट प्रेज़ेंटेशन की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ़ हुई। हालांकि, वे टॉप-30 से आगे नहीं बढ़ पाईं।
ज्यूरी ने बताया कि भारत की मणिका में “पोटेंशियल टू ग्रो” है और यदि वे अगले अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगी तो बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं। भारतीय सोशल मीडिया पर भी मणिका की खूब सराहना हो रही है—लोगों का कहना है कि भले ही वे इस बार टॉप-10 में नहीं पहुंचीं, लेकिन उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व बखूबी किया।
फातिमा की जर्नी: संघर्ष, विवाद और आखिरकार जीत
फातिमा बोश की जर्नी बेहद रोचक रही। कई फैशन एनालिस्ट मानते हैं कि फातिमा की सबसे बड़ी ताकत उनका “pressure handling” है। आलोचकों से उलझना, नेगेटिविटी झेलना और फिर मुस्कान के साथ ग्लोब की सबसे बड़ी ब्यूटी प्रतियोगिता जीत लेना—ये अपने आप में एक बड़ा कमबैक है।
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प्रतियोगिता के दौरान उनका “Empower with Compassion” थीम भाषण जजों को खासा पसंद आया।
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Q&A राउंड में उन्होंने mental health, online bullying और women empowerment पर बेबाकी से जवाब दिए।
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उनकी पर्सनैलिटी में maturity और grace दोनों नजर आए।
सेरेमनी छोड़ने वाली घटना पर उन्होंने फाइनल के बाद कहा—
“किसी की सोच आपकी reality नहीं बनती। जब आपको खुद पर भरोसा होता है, दुनिया की नकारात्मक आवाजें कमजोर पड़ जाती हैं।”
यह बयान सोशल मीडिया पर हजारों लोगों द्वारा शेयर किया जा रहा है।
फाइनल नाइट का माहौल
फाइनल शाम दुनिया भर की नजरो में थी। लाइटिंग, क्रिस्टल थीम स्टेज और लाइव ऑर्केस्ट्रा—सब कुछ इस साल के आयोजन को ग्लोबल लेवल पर एक नया स्टैंडर्ड दे रहा था।
टॉप-5 फाइनलिस्ट के बीच मुकाबला बेहद टफ था, लेकिन फातिमा की कमांडिंग प्रेज़ेंस और उनकी नचुरल शालीनता बाकी सबको पीछे छोड़ गई।
मेक्सिको में जश्न, भारत में मिश्रित प्रतिक्रिया
मेक्सिको में फातिमा की जीत के बाद जश्न का माहौल है। सोशल मीडिया पर #ProudOfFatima ट्रेंड कर रहा है।
वहीं भारत में लोग मणिका विश्वकर्मा के प्रदर्शन पर गर्व जता रहे हैं, साथ ही अगली बार बेहतर वापसी की उम्मीद भी कर रहे हैं।
