भोपाल।
शिक्षा विभाग की जांच में 23 साल पुराना बड़ा घोटाला उजागर हुआ है, जिसमें प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों को लंबे समय तक सरकारी सैलरी दिलवाए जाने का मामला सामने आया है। विभाग ने इस पूरे प्रकरण में संबंधित अधिकारियों को दोषी पाया है और अब करीब 15 करोड़ रुपए की वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, प्राइवेट स्कूलों में कार्यरत कई शिक्षकों को 2001 से 2023 के बीच नियमित रूप से सरकारी वेतन मिलता रहा। विभागीय रिकार्ड में इन शिक्षकों को गलत श्रेणी में दिखाया गया और उन्हें ऐसे लाभ दिए गए, जिनके वे पात्र नहीं थे। मामले के सामने आते ही शिक्षा विभाग ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का संकेत दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, वसूली की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से होगी। संबंधित शिक्षकों एवं अधिकारियों को नोटिस भेजे गए हैं। विभाग जल्द ही पूरी रकम रिकवर करने की तैयारी में है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस अनियमितता को इतने लंबे समय तक कैसे छिपाया गया और किन अधिकारियों की मिलीभगत थी।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने के लिए एक नई मॉनिटरिंग प्रणाली लागू की जाएगी। मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब सभी की निगाहें इस कार्रवाई के आगे के कदमों पर टिकी हैं।
