March 24, 2026
Cheetah Crisis: निगरानी सिस्टम पर उठे बड़े सवाल, तीन दिनों में दो शावकों की मौत से प्रोजेक्ट पर फिर विवाद
भोपाल

Cheetah Crisis: निगरानी सिस्टम पर उठे बड़े सवाल, तीन दिनों में दो शावकों की मौत से प्रोजेक्ट पर फिर विवाद

Dec 9, 2025

कूनो / भोपाल:

कूनो नेशनल पार्क में चीता संरक्षण प्रोजेक्ट एक बार फिर विवादों में घिर गया है। तीन दिनों के भीतर दो शावकों की मौत ने निगरानी तंत्र, प्रबंधन और वैज्ञानिक तैयारियों पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। पहले ही कई वयस्क चीतों की मौत के बाद आलोचनाओं का सामना कर रहे इस प्रोजेक्ट पर अब विशेषज्ञ, वन्यजीव कार्यकर्ता और स्थानीय वन अधिकारी नई चिंता जता रहे हैं।—कैसे हुई दोनों शावकों की मौत? प्रारंभिक रिपोर्ट में क्या निकला?सूत्रों के अनुसार, पहला शावक गंभीर कमजोरी (डिहाइड्रेशन, कुपोषण) के चलते मृत पाया गया। दूसरा शावक सामान्य गश्त के दौरान बेसुध मिला, जिसे रेस्क्यू कर चिकित्सा निरीक्षण में रखा गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका।वन विभाग की प्रारंभिक जांच में निम्न कारण सामने आए:माँ चीता का पर्याप्त भोजन न कर पानाशावकों को पर्याप्त दूध न मिलनाअत्यधिक ठंड/मौसमी बदलावनिगरानी टीम द्वारा देरी से लक्षणों की पहचानहालांकि अंतिम कारणों की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही होगी।—प्रोजेक्ट की सुरक्षा रणनीति पर फिर सवालपहले भी चीतों की मौतों के बाद यह सवाल उठे थे कि—क्या पार्क का तापमान और वातावरण चीतों के अनुकूल है?क्या मॉनिटरिंग टीम अनुभवी और पर्याप्त है?क्या शावकों की निगरानी अलग प्रोटोकॉल से नहीं की जानी चाहिए?क्या प्रोजेक्ट पर राजनीतिक दबाव के कारण जल्दबाजी हो रही है?विशेषज्ञों का कहना है कि शावक चीतों को हाई-रिस्क ज़ोन में रखा गया था और उनकी निगरानी पर्याप्त सटीक नहीं थी।—“हमने सभी दिशा-निर्देश फॉलो किए”—वन विभागवन विभाग का कहना है:> “शावकों पर लगातार नज़र रखी जा रही थी। प्रकृति में जन्मे शावकों की मृत्यु दर 50–70% तक सामान्य होती है। हम सभी प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं।”लेकिन विपक्ष और पर्यावरण विशेषज्ञ इस तर्क से संतुष्ट नहीं हैं।—विपक्ष का आरोप—प्रोजेक्ट प्रचार के लिए, वैज्ञानिक आधार कमजोरविपक्ष ने बयान जारी करते हुए कहा:“चीता प्रोजेक्ट शुरुआत से ही अधूरा और जल्दबाजी में था।”“अंतरराष्ट्रीय सलाहों की अनदेखी की गई।”“स्थानीय परिस्थितियों का वैज्ञानिक मूल्यांकन नहीं किया गया।”उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर प्रोजेक्ट को “ब्रांडिंग का माध्यम” बनाने का आरोप लगाया।—स्थानीय जनजातियों ने भी जताई नाराजगीकूनो के आसपास रहने वाली सहायक जनजातियों का कहना है कि—चीतों की आवाजाही को लेकर गांवों में डर बढ़ रहा हैनिगरानी टीम कई बार घटनाओं की रिपोर्ट देर से लेती हैशावकों की मौतें प्राकृतिक हैं, लेकिन प्रबंधन में खामियां भी हैं—विशेषज्ञों की राय—“नीति में बड़े बदलाव की जरूरत”वन्यजीव विशेषज्ञों ने सुझाव दिए—शावकों के लिए अलग से माइक्रो-इन्क्लोज़र तैयार होंनिगरानी में AI और थर्मल ड्रोन का उपयोग बढ़ेअंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट्स की टीम स्थायी रूप से कूनो में होमौसम आधारित प्रोटोकॉल लागू किया जाएकई वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान सिस्टम “पर्याप्त नहीं” है।—सरकार ने जांच बैठाई — रिपोर्ट 72 घंटे मेंराज्य सरकार ने दोनों मौतों पर उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। 72 घंटे के भीतर पूर्ण रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

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