February 5, 2026
Decision Shock: नोएल टाटा ने मेहली मिस्त्री का रिअपॉइंटमेंट रोका – रतन टाटा के सबसे करीबी माने जाते थे मेहली, आज खत्म हो रहा था 3 साल का कार्यकाल
बिजनेस

Decision Shock: नोएल टाटा ने मेहली मिस्त्री का रिअपॉइंटमेंट रोका – रतन टाटा के सबसे करीबी माने जाते थे मेहली, आज खत्म हो रहा था 3 साल का कार्यकाल

Oct 28, 2025

मुंबई |

Decision Shock:  टाटा समूह के भीतर एक बार फिर सत्ता संतुलन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
समूह के प्रमुख बोर्ड टाटा ट्रस्ट्स ने सोमवार को हुई अहम बैठक में मेहली मिस्त्री (Mehli Mistry) के रिअपॉइंटमेंट (Reappointment) को रोक दिया है। इस फैसले के पीछे नोएल टाटा (Noel Tata) का विरोध प्रमुख माना जा रहा है।

मेहली मिस्त्री, रतन टाटा के लंबे समय से करीबी और विश्वासपात्र रहे हैं। उनका तीन साल का कार्यकाल 28 अक्टूबर 2025 को समाप्त हो रहा था। माना जा रहा था कि उन्हें एक बार फिर बोर्ड में शामिल किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।


कौन हैं मेहली मिस्त्री

मेहली मिस्त्री, मशहूर उद्योगपति पल्लनजी मिस्त्री के रिश्तेदार हैं और शापूरजी पल्लनजी ग्रुप से गहराई से जुड़े रहे हैं। वे टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स दोनों के कई रणनीतिक निर्णयों में शामिल रहे हैं।
रतन टाटा और मेहली मिस्त्री के रिश्ते पुराने और भरोसे पर आधारित माने जाते रहे हैं।

मेहली को समूह में एक “साइलेंट स्ट्रेटेजिस्ट” के तौर पर जाना जाता है, जिन्होंने कई बार मुश्किल हालात में रतन टाटा को सलाह दी। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में टाटा ट्रस्ट्स के भीतर नीतिगत मतभेद बढ़ने लगे थे।


नोएल टाटा की भूमिका

टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा की रिटायरमेंट के बाद नोएल टाटा लगातार संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, उन्होंने मेहली मिस्त्री के रिअपॉइंटमेंट का सख्त विरोध किया था।
नोएल का तर्क था कि समूह को अब नए चेहरों और नई सोच की जरूरत है, जबकि मेहली “पुराने गार्ड” का प्रतिनिधित्व करते हैं।

बोर्ड बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया कि मेहली का कार्यकाल बढ़ाया जाए, लेकिन इस पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी। अंततः निर्णय हुआ कि रिअपॉइंटमेंट को रोका जाए और उनकी जगह नए सदस्य की खोज की जाए।


रतन टाटा का मौन, लेकिन संकेत स्पष्ट

इस पूरे प्रकरण पर अब तक रतन टाटा ने कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की है।
हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स से जुड़े सूत्रों का कहना है कि रतन टाटा इस फैसले से “असहज” हैं, लेकिन उन्होंने संगठनात्मक एकता को ध्यान में रखते हुए चुप्पी साधी है।

मेहली मिस्त्री के बाहर होने से टाटा ट्रस्ट्स के भीतर की पावर इक्वेशन पर असर पड़ सकता है।
कई विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला टाटा समूह के भविष्य की दिशा तय करेगा।


पृष्ठभूमि: पुराने विवादों की छाया

टाटा समूह में इससे पहले भी आंतरिक मतभेदों के चलते साइरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटाया गया था।
उसके बाद से ही समूह के भीतर दो गुटों —