Gold Market: दुनिया भर में बढ़ी सोने की चमक, देखें वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के ताज़ा आंकड़े
2025 के तीसरे क्वार्टर में, वैश्विक ज़रूरत (demand) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची — कुल 1,313 टन सोने की डिमांड हुई, जो अब तक का उच्चतम त्रैमासिक स्तर है। इस साल सोने की कीमतें जबरदस्त उछाल के साथ चल रही हैं — निवेशकों, केंद्रीय बैंकों और सुरक्षित-हैवन (safe-haven) चाहने वालों ने सोने में भरोसा दिखाया है। अगले साल (2026) के लिए WGC ने अनुमान लगाया है कि सोने की कीमतें मौजूदा स्तर से 15–30% तक बढ़ सकती हैं। —📈 क्यों चमक रहा है सोना — मुख्य कारण1. विश्व आर्थिक व जियो-राजनीतिक अनिश्चितता — कई देशों में मुद्रास्फीति, वित्तीय अस्थिरता और मुद्रास्फीति-ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव से सोना सुरक्षित विकल्प बना हुआ है। 2. डॉलर की कमजोरी और ब्याज दरों में संभावित कटौती — खासकर अमेरिका में संभावित ब्याज दर कटौती की उम्मीद से सोना आकर्षक निवेश बन गया। 3. निवेश-मांग में बूम — ETF व अन्य निवेश चैनलों के जरिए सोने में निवेश बढ़ा है। Q3 2025 में निवेश आधारित मांग (investment demand) में तीव्र वृद्धि देखी गई। 4. केंद्रीय बैंकों द्वारा भंडारण (Reserve Buying) — विश्व के कई सेंट्रल बैंक सोने की खरीदारी बढ़ा रहे हैं, जिससे मांग और सप्लाई असंतुलन बना है। —💡 2026 क्यूँ महत्वपूर्ण साल हो सकता हैWGC ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि 2026 में —यदि आर्थिक अस्थिरता, मुद्रास्फीति व डॉलर अस्थिरता जैसी स्थितियाँ बनी रहती हैं, तो सोने की कीमतों में त्वरित बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था स्थिर होती है, ब्याज दरें बढ़ती हैं, और निवेशकों का रुझान फिर से इक्विटी या अन्य असेट्स की ओर जाता है — तो सोने में गिरावट भी संभव है। इसलिए, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशक सोने में प्रवेश सोच-समझकर करें और लिक्विडिटी, निवेश अवधि व बाजार जोखिमों का ध्यान रखें।—🇮🇳 भारत में सोने की चमक — क्या असर होगा?भारत में सोने के जेवरों की मजबूत मांग है। बढ़ती वैश्विक कीमत और डॉलर-रुपया विनिमय दर (Exchange Rate) सोने की घरेलू कीमतों को प्रभावित कर सकती है।निवेशकों और ज्वैलर्स दोनों के लिए यह वक्त सोने में निवेश या ज्वैलरी खरीदने का मौका हो सकता है — लेकिन कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण सतर्कता जरूरी है।यदि 2026 में WGC की भविष्यवाणी सच हुई, तो सोने की निवेश-प्राप्ति बढ़ सकती है, लेकिन साथ ही बाजार में तरलता व अलवेवल्यूएशन (Overvaluation) का ख्याल रखना होगा।
