he Student Who Taught His Teacher: मास्टर की कुर्सी पर खुद बैठे, ब्लैकबोर्ड पर गलती सुधारी”
नई दिल्ली |
भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल न केवल एक कुशल नेता थे, बल्कि अपने छात्र जीवन में भी बेहद तेज, आत्मविश्वासी और अनुशासित विद्यार्थी रहे। उनके स्कूल के दिनों की कई ऐसी कहानियां हैं जो आज भी प्रेरणा देती हैं।
ब्लैकबोर्ड पर गलती सुधारी — आत्मविश्वास की मिसाल
कहा जाता है कि एक बार उनके टीचर ने गणित के सवाल में गलती कर दी। सरदार पटेल ने झिझकने के बजाय ब्लैकबोर्ड पर खुद जाकर गलती सुधार दी।
शुरुआत में शिक्षक नाराज़ हुए, लेकिन जब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ तो उन्होंने खुलेआम पटेल की तारीफ़ की।
मास्टर की कुर्सी पर बैठे — अनुशासन और स्वाभिमान का प्रतीक
एक और किस्सा मशहूर है कि जब स्कूल के मास्टर देर से आते थे, तो पटेल खुद मास्टर की कुर्सी पर बैठ जाते और कक्षा को अनुशासित रखते।
उनका मानना था — “समय की पाबंदी ही सफलता की पहली सीढ़ी है।”
टीचर के विरोध में गाना गाया
एक बार जब शिक्षक लगातार देरी से आने लगे, तो सरदार पटेल और उनके दोस्तों ने विरोध के लिए एक व्यंग्य गीत गाया।
क्लास में गूंज उठा —
“मास्टरजी देर से आएं, पढ़ाई फिर कैसे चल पाए!”
इस पर शिक्षक पहले नाराज़ हुए लेकिन बाद में मुस्कराकर बोले — “तुममें नेतृत्व की चिंगारी है।”
लौह पुरुष बनने की नींव बचपन में पड़ी
यही अनुशासन, साहस और नेतृत्व की भावना उनके जीवनभर बनी रही। वकालत, स्वतंत्रता संग्राम और बाद में देश के एकीकरण में भी उनकी यही विशेषताएँ चमकीं।
इसी कारण उन्हें “Iron Man of India” कहा गया।
