इंदौर।
राज्य के प्राचीन धार्मिक स्थलों को लेकर कई ऐतिहासिक तथ्य और किवदंतियाँ समय-समय पर सामने आती रहती हैं। इसी क्रम में अब मध्यप्रदेश के एक बेहद पुराने मंदिर को लेकर नई जानकारी सुर्खियों में है। माना जाता है कि यह वही स्थान है जहाँ छत्रपति शिवाजी महाराज साधु के वेश में गुप्त रूप से आए थे, और इसी मंदिर में पहले गुरु श्री गुरु नानक देव जी ने भी आसन लगाया था। यह स्थल आज भी आस्था, इतिहास और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम माना जाता है।शिवाजी महाराज क्यों आए थे साधु वेश में?ऐतिहासिक संदर्भ बताते हैं कि शिवाजी महाराज समय-समय पर रणनीतिक यात्राएँ गुप्त रूप से किया करते थे। कई प्रमाण यह दर्शाते हैं कि वे एक विशेष मिशन के दौरान साधु वेश धारण कर मध्यप्रदेश के इस मंदिर पहुँचे थे, ताकि पहचान गुप्त रहे और मुगल जासूसों की नज़र से बचा जा सके। मंदिर के ग्रंथों में उनके आगमन का उल्लेख आज भी विद्यमान है।गुरु नानक देव जी का प्रवासपंथ-परंपराओं के अनुसार, गुरु नानक देव जी अपनी यात्रा के दौरान इस प्राचीन धाम पहुंचे थे। बताया जाता है कि उन्होंने यहाँ साधना की और स्थानीय लोगों को आध्यात्मिक उपदेश दिए। मंदिर प्रबंधन के पास भी इस बात को पुष्ट करने वाले कई पुरालेख और परंपराएँ मौजूद हैं।मंदिर की ऐतिहासिक महत्तायह मंदिर कई युगों से आस्था का केंद्र रहा है। स्थानीय पुजारियों के अनुसार, यह स्थल कई संतों, योद्धाओं और आध्यात्मिक गुरुओं का आश्रय स्थान रहा है। पत्थरों पर उकेरी गई कई प्रतीकात्मक आकृतियाँ इसकी पुरातनता और पौराणिक महत्त्व को दर्शाती हैं।पर्यटन विभाग करेगा प्रोत्साहितमध्यप्रदेश पर्यटन विभाग इस स्थान को “हेरिटेज सर्किट” में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। इतिहासकारों का भी मानना है कि शिवाजी और गुरु नानक देव से जुड़ा यह स्थल आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा तीर्थ-पर्यटन केंद्र बन सकता है।स्थानीय श्रद्धालुओं में उत्साहशिवाजी महाराज और गुरु नानक जी से जुड़ाव की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में गर्व और उत्साह है। मंदिर में श्रद्धालुओं का आना बढ़ गया है। कई धार्मिक और ऐतिहासिक संगठन यहाँ विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी में हैं।
