March 26, 2026
Indore Health Lapse: ओपीडी समय में प्राइवेट क्लीनिक पर मरीज देख रहे सरकारी डॉक्टर
इंदौर

Indore Health Lapse: ओपीडी समय में प्राइवेट क्लीनिक पर मरीज देख रहे सरकारी डॉक्टर

Dec 8, 2025

इंदौर।

शहर में स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता को लेकर सवाल तब खड़े हो गए जब एक बड़ी अनियमितता सामने आई। जानकारी के अनुसार, इंदौर के कई सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टर ओपीडी के निर्धारित समय में सरकारी अस्पताल छोड़कर अपने प्राइवेट क्लीनिक पर मरीजों को देख रहे थे। यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तथ्य जुटाने और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।—ओपीडी छोड़कर निजी क्लीनिक में मरीजों की भीड़सूत्रों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कुछ सरकारी डॉक्टर सुबह के ओपीडी समय में ही अपने निजी क्लीनिक पर बैठे मिले। सरकारी अस्पताल में मरीज उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे, जबकि वही डॉक्टर घंटे भर पहले प्राइवेट सेंटर पर मौजूद थे।स्थानीय नागरिकों द्वारा बताया गया—> “हम सुबह से लाइन में खड़े थे, लेकिन डॉक्टर नहीं आए। बाद में पता चला कि वे अपने निजी क्लीनिक में मरीज देख रहे हैं।”—सरकारी सेवा शर्तों का उल्लंघनमेडिकल सर्विस रूल्स के अनुसार, किसी भी सरकारी डॉक्टर को—ओपीडी समय में अस्पताल छोड़नाबिना अनुमति निजी क्लीनिक चलानाया प्राइवेट प्रैक्टिस को प्राथमिकता देनासख्त रूप से निषिद्ध है। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए कई डॉक्टर अपनी प्राइवेट कमाई को सरकारी सेवा से ऊपर रखते पाए गए।वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों ने माना है कि अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह गंभीर सेवा उल्लंघन की श्रेणी में आएगा।—मरीजों को भारी परेशानीसरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण—मरीजों की लंबी कतारेंइलाज में देरीबुजुर्ग व गंभीर मरीजों की हालत बिगड़नाऔर अस्पताल स्टाफ के साथ विवादजैसी स्थिति बनी रही। कई मरीजों ने कहा कि उन्हें निजी अस्पताल जाना पड़ा, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ गया।—निरीक्षण टीम ने जुटाए सबूतस्वास्थ्य विभाग की टीम ने अलग-अलग समय पर अस्पतालों और निजी क्लीनिकों का निरीक्षण किया। निरीक्षण में सामने आया कि—डॉक्टर सरकारी अस्पताल में उपस्थिति दर्ज करते हैंथोड़ी देर रुककर अपने निजी क्लीनिक चले जाते हैंकई क्लीनिकों में ओपीडी सरकारी समय से पहले खुल जाती हैक्लीनिक स्टाफ डॉक्टर के आने की जानकारी पहले से रखता हैटीम ने सीसीटीवी फुटेज, उपस्थिति रजिस्टर और क्लीनिक रिकॉर्ड की जांच की है।—स्वास्थ्य विभाग का बयानस्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा—> “हमने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। यदि कोई डॉक्टर सरकारी समय में निजी क्लीनिक पर पाया गया, तो विभाग सख्त कार्रवाई करेगा।”अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में—नोटिस जारीविभागीय जांचवेतन कटौतीप्राइवेट प्रैक्टिस पर रोकऔर सस्पेंशनजैसी कार्रवाई संभव है।—सरकार भी हुई सख्तराज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को निजी लाभ के लिए नजरअंदाज करना किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि—अस्पतालों में औचक निरीक्षण बढ़ाया जाएडॉक्टरों की उपस्थिति डिजिटल सिस्टम से रिकॉर्ड होअनुपस्थित मिलने वालों पर त्वरित कार्रवाई की जाए—डॉक्टरों का पक्षकुछ डॉक्टरों का कहना है कि—सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कमीमरीजों का अत्यधिक भारऔर स्टाफ की कमीके कारण वे निजी क्लीनिक पर निर्भर होते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का तर्क है कि “समस्याएँ हो सकती हैं, पर इससे नियम तोड़ने का अधिकार नहीं मिल जाता।”—नागरिकों ने की सख्त कार्रवाई की मांगशहर के नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने कहा कि—> “सरकारी डॉक्टर सार्वजनिक धन से वेतन लेते हैं। उन्हें ओपीडी समय में अस्पताल में ही रहना चाहिए।”सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा चर्चा में है और लोग इसे स्वास्थ्य प्रणाली की बड़ी कमी बता रहे हैं।

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