Liver Transplant कैसे होता है, जानिए कब और क्यों पड़ती है इसकी ज़रूरत
नई दिल्ली |
लिवर हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो पाचन से लेकर शरीर में मौजूद हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है। जब लिवर पूरी तरह से खराब हो जाता है या अपनी क्षमता खो देता है, तब लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। यह एक जटिल लेकिन जीवनरक्षक सर्जरी होती है, जिसमें बीमार व्यक्ति का खराब लिवर निकालकर उसकी जगह किसी डोनर का स्वस्थ लिवर लगाया जाता है।
क्या है लिवर ट्रांसप्लांट
लिवर ट्रांसप्लांट (Liver Transplant) एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें मरीज का क्षतिग्रस्त या असफल लिवर हटाकर किसी दाता (Donor) के स्वस्थ लिवर से बदल दिया जाता है।
लिवर की सबसे खास बात यह है कि यह शरीर का एकमात्र अंग है जो खुद को पुनर्जीवित (Regenerate) कर सकता है।
इसी कारण, कई बार Living Donor Transplant में डोनर का केवल एक हिस्सा निकाला जाता है और कुछ महीनों में उसका लिवर फिर से सामान्य आकार में बढ़ जाता है।
कब पड़ती है लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत
लिवर ट्रांसप्लांट तभी किया जाता है जब दवाओं या अन्य इलाज से मरीज की स्थिति में सुधार संभव नहीं रहता। इसके प्रमुख कारण हैं:
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क्रॉनिक लिवर डिज़ीज़ (Chronic Liver Disease)
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सिरोसिस (Cirrhosis) – लंबे समय तक शराब सेवन, हेपेटाइटिस बी या सी संक्रमण के कारण
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एक्यूट लिवर फेल्योर (Acute Liver Failure) – अचानक लिवर का काम करना बंद कर देना
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लिवर कैंसर (Hepatocellular Carcinoma)
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जन्मजात लिवर रोग (Congenital Liver Disease) – बच्चों में देखा जाता है
लिवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया
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डोनर की पहचान और टेस्टिंग:
डोनर का लिवर मैच होना बेहद ज़रूरी है। टेस्ट के जरिए यह जांचा जाता है कि उसका लिवर स्वस्थ और संगत (compatible) है या नहीं। -
सर्जरी:
मरीज का खराब लिवर निकालकर डोनर का स्वस्थ लिवर प्रत्यारोपित किया जाता है। यह ऑपरेशन सामान्यतः 8 से 12 घंटे तक चल सकता है। -
रिकवरी:
सर्जरी के बाद मरीज को कुछ दिन ICU में रखा जाता है। पूरा रिकवरी पीरियड 2 से 3 महीने का होता है। -
इम्यूनो सप्रेसिव दवाएं:
मरीज को ऐसी दवाएं दी जाती हैं जो शरीर को नए लिवर को रिजेक्ट (अस्वीकार) करने से रोकती हैं।
कितनी सफल होती है लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी
मेडिकल साइंस की प्रगति के कारण आज लिवर ट्रांसप्लांट की सफलता दर 85 से 90 प्रतिशत तक है।
भारत में कई बड़े अस्पताल जैसे एम्स, अपोलो, मेडांटा, फोर्टिस आदि में हर साल सैकड़ों सफल ट्रांसप्लांट किए जाते हैं।
ध्यान देने योग्य बातें
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सर्जरी के बाद स्वस्थ जीवनशैली अपनाना ज़रूरी है।
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शराब और नशे से पूरी तरह दूरी बनाए रखना चाहिए।
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नियमित फॉलोअप और ब्लड टेस्ट बेहद जरूरी होते हैं।
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समय पर दवाएं न लेने से शरीर नए लिवर को रिजेक्ट कर सकता है।
विशेषज्ञों की राय
गैस्ट्रो सर्जन डॉक्टरों का कहना है कि अगर लिवर की बीमारी का समय पर इलाज न किया जाए, तो मरीज को गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।
लिवर ट्रांसप्लांट उन मरीजों के लिए जीवनदान साबित होता है जिनका लिवर पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है।
