Mental health: पेरेंट्स जॉब के लिए बाहर नहीं जाने देते — फैमिली कंजरवेटिव है, दिल करता है भाग जाऊं
नई दिल्ली |
Mental health: देश में तेजी से बदलती सोशल वैल्यूज़ और कंजरवेटिव पारिवारिक सोच के बीच आज के युवा दोहरी मानसिक स्थिति से जूझ रहे हैं।
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक लड़की का पोस्ट वायरल हुआ, जिसमें उसने लिखा —
“पेरेंट्स बाहर जॉब करने नहीं देते, फैमिली बहुत कंजरवेटिव है… दिल करता है भाग जाऊं, पर समझ नहीं आता क्या करूं।”
यह पोस्ट हजारों युवाओं के दिल की बात बन गया है — जो अपने सपनों और पारिवारिक सीमाओं के बीच फंसे हुए हैं।
परिवार की सोच बनाम युवाओं की आकांक्षा
भारत में अब भी कई परिवारों में खासकर बेटियों के लिए “घर से बाहर नौकरी” को लेकर झिझक बनी हुई है।
माता-पिता का डर — “सुरक्षा”, “समाज”, और “इज्जत” के इर्द-गिर्द घूमता है,
जबकि युवा अपने कैरियर, स्वतंत्रता और पहचान के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा —
“कभी-कभी लगता है जैसे पिंजरे में पंख फैलाने की कोशिश कर रही हूं।”
मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स की राय
क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट्स का कहना है कि इस तरह के हालात में युवाओं में एंग्जायटी, लो कॉन्फिडेंस और डिप्रेशन जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।
डॉ. निधि वर्मा (काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट, दिल्ली) कहती हैं —
“जब कोई युवा लगातार अपने सपनों को दबाता है, तो उसका असर आत्म-सम्मान और मानसिक सेहत दोनों पर पड़ता है।
जरूरी है कि परिवार संवाद का रास्ता चुने, टकराव का नहीं।”
रिपोर्ट्स क्या कहती हैं
2024 की नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे रिपोर्ट के अनुसार,
भारत में 18 से 29 वर्ष के युवाओं में 65% लोग पारिवारिक दबाव के कारण करियर तनाव झेल रहे हैं।
इनमें से एक बड़ा हिस्सा खासकर छोटे शहरों से आता है, जहां अब भी सामाजिक सोच परंपरागत है।
समाधान की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गैप को भरने के लिए
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परिवारों को बदलते समय के अनुरूप सोच अपनानी होगी,
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और युवाओं को धैर्यपूर्वक संवाद करना सीखना होगा।
साथ ही, मेंटल हेल्थ हेल्पलाइन और काउंसलिंग सर्विसेस को अधिक सुलभ बनाना बेहद जरूरी है।
यदि किसी को ऐसी स्थिति से गुजरना पड़ रहा है, तो तुरंत मदद लेना चाहिए।
