उज्जैन, मध्य प्रदेश:
मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले 24 घंटे के भीतर दो बड़े फैसलों में तेजी से बदलाव किया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि सिंहस्थ लैंड पूलिंग एक्ट को वापस लिया जाएगा और ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया गया है। इसके साथ ही, जनता की भागीदारी को महत्व देते हुए कहा गया है कि नया प्लान आम लोगों की राय को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।
मुख्य बिंदु:
सिंहस्थ लैंड पूलिंग एक्ट रद्द: यह कानून, जिसे सिंहस्थ मेले के आयोजन के लिए भूमि अधिग्रहण और विकास को सुगम बनाने के लिए बनाया गया था, अब प्रभावहीन किया जाएगा।
ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट समाप्त: ममलेश्वर तालाब से जुड़े विकास परियोजना को अब आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। यह प्रोजेक्ट, जिसे धार्मिक और पर्यटन दृष्टिकोण से महत्व दिया गया था, अब बंद किया जा रहा है।
जनता की सहभागिता: मुख्यमंत्री ने साफ़ किया है कि आगे का नया योजना रखरखाव, धार्मिक आयोजनों और भूमि उपयोग को लेकर आम जनता की राय पर आधारित होगा।
पारदर्शिता पर ज़ोर: नए प्लान में पारदर्शिता और लोक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए पब्लिक कंसल्टेशन (जन-सम्मेलनों) का आयोजन किया जाएगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना है कि धार्मिक महोत्सव और पर्यटन विकास दोनों को संतुलित किया जाए, लेकिन इसके लिए स्थानीय लोगों की आवाज़ को अनदेखा नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह पलटफेर प्रेशर ग्रुप्स, स्थानीय समुदायों और धार्मिक संगठनों की आपत्तियों के बाद आया है। उन्होंने यह भी कहा है कि यह कदम सरकार की सुनने और सुधारने की नीति को दर्शाता है, लेकिन इसके साथ यह चुनौती भी है कि नया योजना कैसे तैयार किया जाएगा और किस हद तक यह जनता की अपेक्षाओं को पूरा करेगा।
आगामी सप्ताह में ऐसे सार्वजनिक प्लेटफॉर्म बनाए जाने की संभावना है जहाँ आम नागरिक और स्टेकहोल्डर्स अपनी राय रख सकेंगे। सरकार द्वारा कहा गया है कि नया ब्लूप्रिंट तैयार करने में राजस्व, पर्यावरण, पर्यटन और धार्मिक संतुलन सभी पहलुओं का ध्यान रखा जाएगा।
