मुंबई:
महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। मंगलवार को हुई राज्य कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट के कई मंत्री शामिल नहीं हुए। इस अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों को तेज कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, शिंदे शिवसेना में बढ़ती नाराजगी की वजह बीजेपी की कथित दखल को माना जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि शिवसेना (शिंदे गुट) के कई वरिष्ठ नेता इस बात से नाखुश हैं कि भारतीय जनता पार्टी राज्यभर में सक्रिय रूप से शिवसेना के जमीनी कार्यकर्ताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है। बताया जा रहा है कि कई जिलों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें बीजेपी के स्थानीय पदाधिकारियों पर शिंदे गुट के मजबूत कार्यकर्ताओं को तोड़ने का आरोप लगाया गया है।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि, “हम गठबंधन धर्म निभा रहे हैं, लेकिन यह ठीक नहीं है कि हमारे ही कार्यकर्ताओं को कमजोर किया जाए। इस मुद्दे पर शीर्ष नेतृत्व का ध्यान अभी तक नहीं गया है, इसलिए नाराजगी बढ़ रही है।”
कैबिनेट बैठक में अनुपस्थिति को लेकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि पार्टी इस पूरी स्थिति को लेकर गंभीर है और जल्द ही आंतरिक समीक्षा बैठक बुलाए जाने की संभावना है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव के बाद से महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन के भीतर खींचतान लगातार बढ़ती जा रही है। शिवसेना-शिंदे गुट और बीजेपी के बीच बढ़ रही दूरी आने वाले महीनों में राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकती है।
इधर, बीजेपी की ओर से इन आरोपों को निराधार बताया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि गठबंधन पूरी मजबूती के साथ काम कर रहा है और कार्यकर्ताओं के जुड़ने का सिलसिला लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
महाराष्ट्र में अगले कुछ महीनों के भीतर बड़े राजनीतिक फैसले होने की संभावना है, ऐसे में शिवसेना की यह नाराजगी गठबंधन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
