March 24, 2026
Pressure Irrigation Model: मध्य प्रदेश की तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ में भी बनेगा ‘प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क’
रायपुर

Pressure Irrigation Model: मध्य प्रदेश की तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ में भी बनेगा ‘प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क’

Dec 8, 2025

रायपुर।

छत्तीसगढ़ में सिंचाई क्षमता बढ़ाने और किसानों को आधुनिक तकनीक आधारित जल प्रबंधन उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मध्य प्रदेश की तरह अब छत्तीसगढ़ में भी ‘प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क’ विकसित किया जाएगा। इस योजना का लक्ष्य खेतों तक नियंत्रित दबाव के साथ पानी पहुंचाना, फसल उत्पादन बढ़ाना और जल की बर्बादी को न्यूनतम करना है।राज्य सरकार का दावा है कि यह तकनीक आने वाले वर्षों में सिंचाई के पारंपरिक तरीकों को काफी हद तक बदल देगी। मुख्यमंत्री कार्यालय और जल संसाधन विभाग ने इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता सूची में शामिल किया है।—क्या है प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क?यह एक आधुनिक सिंचाई प्रणाली है, जिसमें पानी को पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए नियत दबाव (Pressure Control) के साथ खेतों तक पहुंचाया जाता है। इसके बड़े फायदे इस प्रकार हैं—पानी की बर्बादी लगभग 40–50% कमटेल एंड (आखिरी छोर) वाले खेतों तक समान मात्रा में पानीड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीक से आसान कनेक्शनबिजली और पंपिंग लागत में कमीफसल उत्पादन में बढ़ोतरीमध्य प्रदेश में इस तकनीक ने अनेक जिलों में सिंचाई दक्षता और फसल उत्पादकता में सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं।—छत्तीसगढ़ में क्यों बढ़ी ज़रूरत?विशेषज्ञों के अनुसार छत्तीसगढ़ में—बारिश पर निर्भरता अधिक हैकई क्षेत्रों में नहरें अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचा पातींभूजल स्तर कई बांध क्षेत्रों में लगातार गिर रहा हैकिसानों को रबी फसलों में बार-बार सिंचाई की जरूरत होती हैऐसे में प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क एक सस्टेनेबल मॉडल के रूप में सामने आया है।—पहले चरण में किन जिलों में होगी शुरुआतसूत्रों के अनुसार प्रोजेक्ट के पहले चरण में इन जिलों को प्राथमिकता दी जा रही है—धमतरीदुर्गराजनांदगांवमहासमुंदबलौदाबाजारइन जिलों में प्रमुख बांधों और बैराजों से पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने की योजना तैयार की जा रही है।—सरकार का दावा—छोटे किसानों को सबसे बड़ा लाभजल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस योजना से सबसे अधिक लाभ छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा क्योंकि—उन्हें अपने छोटे खेतों तक पर्याप्त दबाव वाला पानी मिलेगापंप सेट या मोटर पर निर्भरता कम होगीफसल की गुणवत्ता बेहतर होगीफसल चक्र में अधिक विकल्प मिलेंगेइसके अलावा सरकार का कहना है कि यह योजना किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगी।—MP मॉडल को क्यों माना जा रहा सफल?मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में—विभिन्न जिलों में 1.20 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में इस प्रोजेक्ट का विस्तारसिंचाई दक्षता में 30–35% सुधारटेल एंड किसानों को लगातार जल उपलब्धताफसल उत्पादन में 18–22% तक वृद्धियही कारण है कि छत्तीसगढ़ सरकार इस मॉडल को अपनाने के लिए उत्साहित है।—वित्तीय प्रावधान और कार्ययोजनायोजना के लिए बड़ा बजट तैयार किया गया है। केंद्र और राज्य मिलकर फंडिंग करेंगे। पहली किस्त में करीब 2,800 करोड़ रुपये तक की लागत का अनुमान लगाया जा रहा है।इंजीनियरिंग और DPR (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है।—कब तक दिखेंगे परिणाम?अधिकारियों के मुताबिक—पहले चरण के काम 2026 की शुरुआत से शुरू18–24 महीनों में प्रमुख इलाकों में पहला आउटपुट2030 तक राज्य के बड़े हिस्से में नेटवर्क तैयार होने की संभावना

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