फिजिकल हेल्थ – Antibiotics हो रही Rapidly Ineffective: जरूरत से ज्यादा दवा खा रहे लोग, Doctors ने दी बड़ी Warning
देशभर में एंटीबायोटिक्स के बढ़ते दुरुपयोग को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। डॉक्टरों का कहना है कि लोग बिना जरूरत दवाएं खरीदकर खा रहे हैं, जिसके कारण शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (Antibiotic Resistance) तेजी से बढ़ रहा है। यह स्थिति आने वाले वर्षों में भारत के लिए एक बड़ा हेल्थ संकट बन सकती है। खासकर सर्दियों के मौसम में लोग सामान्य खांसी-जुकाम की शुरुआत होते ही मेडिकल स्टोर्स से खुद ही एंटीबायोटिक्स खरीद लेते हैं, जिसका कोई फायदा नहीं होता बल्कि नुकसान ज़रूर होता है।
अभी क्या स्थिति है?
हालिया हेल्थ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस काफी बढ़ा है। देश में लगभग हर उम्र के लोग किसी ना किसी तरह से Self-medication की आदत डाल चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज 2-3 दिन में ठीक न होने पर तुरंत स्ट्रॉन्ग दवा मांगते हैं, जबकि कई बीमारियों में एंटीबायोटिक्स की जरूरत ही नहीं होती।
विशेषज्ञों के अनुसार—
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करीब 70% मरीज खांसी-जुकाम में एंटीबायोटिक मांग लेते हैं, जबकि यह सामान्य रूप से वायरल इंफेक्शन होता है।
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पेट दर्द, डायरिया, बुखार जैसी कई स्थितियाँ भी बिना एंटीबायोटिक के ठीक हो सकती हैं।
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लेकिन लोग जल्दी राहत पाने के चक्कर में स्ट्रॉन्ग दवा ले लेते हैं।
डॉक्टरों ने यह भी बताया कि मेडिकल स्टोर्स पर एंटीबायोटिक बिना प्रिस्क्रिप्शन के आसानी से मिल जाने के कारण यह आदत और तेज़ी से फैल रही है।
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कितनी बड़ी समस्या बन रही है?
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस तब होती है जब शरीर में मौजूद बैक्टीरिया दवाओं के प्रति लड़ने योग्य बन जाते हैं। जिस दवा से पहले बीमारी ठीक हो जाती थी, वह अब असर नहीं करती। यह स्थिति खतरनाक इसलिए है क्योंकि—
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संक्रमण लंबे समय तक बना रहता है
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डॉक्टर को और स्ट्रॉन्ग दवाएं देनी पड़ती हैं
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शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है
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जटिल संक्रमणों का इलाज मुश्किल हो जाता है
वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले समय में कई सामान्य बीमारियों का इलाज मुश्किल हो सकता है।
WHO ने भी इसे Global Health Threat बताया है।
क्यों पड़ी दवा बेअसर होने की नौबत?
डॉक्टरों का कहना है कि इसके पीछे कई कारण हैं:
1. खुद से दवा खरीदना (Self Medication)
भारत में यह सबसे बड़ा कारण है। लोग डॉक्टर के पास जाने से पहले ही 3-4 दिन स्ट्रॉन्ग दवाएं खा लेते हैं।
2. पूरा कोर्स न करना
बहुत से लोग दवा 2-3 दिन में ही छोड़ देते हैं। इससे बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म नहीं होते और शरीर में मजबूत होकर वापस पनपते हैं।
3. गलत बीमारी में दवा लेना
वायरल में एंटीबायोटिक का कोई फायदा नहीं होता, लेकिन लोग बिना समझे खा लेते हैं।
4. डॉक्टर से स्ट्रॉन्ग दवा लिखवाना
कुछ मरीज तुरंत आराम पाने के लिए डॉक्टर पर दबाव डालते हैं। इससे अनावश्यक Antibiotic course शुरू हो जाता है।
5. दवाओं का Easy Availability
मेडिकल स्टोर्स पर बिना प्रिस्क्रिप्शन के आसानी से दवाएं मिल जाती हैं, जिससे दुरुपयोग बढ़ता है।
कौन-सी बीमारियों में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती?
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वायरल बुखार
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सर्दी-जुकाम
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फ्लू
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सामान्य खांसी
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डायरिया (ज्यादातर मामलों में)
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वायरल थ्रोट इंफेक्शन
डॉक्टरों के मुताबिक, इन बीमारियों में आराम, पानी, भाप, हल्का भोजन ही काफी होता है। एंटीबायोटिक तभी दी जाती है जब बैक्टीरियल इंफेक्शन का स्पष्ट संकेत हो।
डॉक्टरों की चेतावनी: इन स्थितियों में कभी भी खुद से दवा न लें
जानकारों ने लोगों से खासकर रिक्वेस्ट की है कि नीचे दिए गए मामलों में डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक न लें:
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बुखार 2-3 दिन में कम न हो
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छाती में तेज दर्द
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तेज खांसी के साथ खून
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बार-बार डायरिया
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अचानक तेज कमजोरी
विशेषज्ञों का कहना है कि खुद से दवा लेने की वजह से सही बीमारी का समय पर पता नहीं चलता और बाद में स्थिति बिगड़ती जाती है।
क्या करें? बचाव ही इलाज है
✔ दवा सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर लें
✔ पूरा कोर्स करें, बीच में दवा न छोड़ें
✔ वायरल बीमारी में एंटीबायोटिक न मांगें
✔ हल्का बुखार या खांसी में घरेलू देखभाल अपनाएं
✔ बच्चों को कभी भी खुद से दवा न दें
✔ मेडिकल स्टोर से स्ट्रॉन्ग दवा खुद न खरीदें
डॉक्टरों का कहना है कि जागरूकता ही इस समस्या का सबसे बड़ा समाधान है। यदि लोग अनावश्यक दवाएं बंद कर दें तो एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस काफी हद तक कम किया जा सकता है।
