March 25, 2026
Toothbrush पर होते हैं करोड़ों Bacteria – जानिए कब करना चाहिए Replace?”
हेल्थ

Toothbrush पर होते हैं करोड़ों Bacteria – जानिए कब करना चाहिए Replace?”

Oct 30, 2025

आपका टूथब्रश एक छोटा-सा इकोसिस्टम है, जिसमें हर दिन करोड़ों सूक्ष्म जीव (माइक्रोब्स) पनपते हैं.

इसके टूटे और फैले रेशे एक सूखी ज़मीन की तरह होते हैं, जो हर बार पानी लगने पर कुछ देर के लिए गीली होकर पोषक तत्वों से भर जाती है. इन प्लास्टिक के महीन रेशों के बीच लाखों जीव रहते हैं.

इस समय आपके टूथब्रश पर करीब 10 लाख से लेकर 1.2 करोड़ तक बैक्टीरिया और फंगस मौजूद हो सकते हैं. ये सैकड़ों अलग-अलग प्रजातियों से आते हैं और टूथब्रश की सतह पर एक जैविक परत बना लेते हैं.

कुछ तो पुराने रेशों की दरारों में भी घुस जाते हैं. हर दिन जब हम ब्रश करते हैं, तो उसमें पानी, लार, त्वचा की कोशिकाएं और खाने के छोटे-छोटे कण पहुंचते हैं. यही सब मिलकर इन जीवाणुओं को बढ़ने का मौका देते हैं. कभी-कभी आसपास के टॉयलेट फ्लश या खिड़की खुलने पर हवा से आने वाले सूक्ष्म जीव भी इसमें शामिल हो जाते हैं और फिर दिन में दो बार हम यही मिश्रण अपने मुंह में डालकर अच्छे से घुमा लेते हैं.
तो क्या हमें इस बात की चिंता करनी चाहिए कि हमारा टूथब्रश कितना साफ़ है?

यह सवाल कई सालों से डेंटिस्ट और डॉक्टरों को परेशान करता रहा है. इसी वजह से उन्होंने यह समझने की कोशिश की है कि हमारे टूथब्रश पर कौन-कौन से जीव रहते हैं, वे कितने ख़तरनाक हो सकते हैं और हमें अपने ब्रश को कैसे साफ़ रखना चाहिए.

टूथब्रश पर सूक्ष्म जीवों के संक्रमण पर शोध करने वाले जर्मनी की राइन-वेल यूनिवर्सिटी ऑफ़ एप्लाइड साइंसेज़ के माइक्रोबायोलॉजिस्ट मार्क-केविन ज़िन कहते हैं, “टूथब्रश पर मौजूद सूक्ष्म जीव मुख्य रूप से तीन जगहों से आते हैं. ये तीन स्रोत हैं – हमारे मुंह, हमारी त्वचा और वह जगह जहां टूथब्रश रखा जाता है.”

लेकिन टूथब्रश इस्तेमाल करने से पहले ही उस पर बड़ी संख्या में सूक्ष्म जीव मौजूद हो सकते हैं.

ब्राज़ील में किए गए एक अध्ययन में 40 नए टूथब्रशों की जांच की गई थी, जो अलग-अलग कंपनियों से खरीदे गए थे. नतीजे में पाया गया कि उनमें से आधे पहले से ही कई तरह के बैक्टीरिया से संक्रमित थे.

अच्छी बात यह है कि ज़्यादातर सूक्ष्म जीव हानिकारक नहीं होते. अधिकतर हमारे अपने मुंह से आते हैं. हर बार जब हम ब्रश करते हैं, तो उसके रेशे हमारे मुंह में मौजूद सूक्ष्म जीवों जैसे रोथिया डेन्टोकारिओसा, स्ट्रेप्टोकॉकस माइटिस और एक्टिनोमायसीज़ समूह के बैक्टीरिया को समेट लेते हैं.

ये सभी सामान्य रूप से हमारे मुंह में पाए जाते हैं और नुक़सान नहीं पहुंचाते. इनमें से कुछ तो हमारे दांतों को सड़न पैदा करने वाले जीवाणुओं से भी बचाने में मदद करते हैं.

हालांकि, इन्हीं के बीच कुछ ऐसे जीव भी छिपे होते हैं जो हमारे लिए हानिकारक हैं.

ब्राज़ील की यूनिवर्सिटी ऑफ़ साओ पाउलो के डेंटिस्ट्री प्रोफे़सर विनिसियस पेद्राज़ी बताते हैं, “सबसे ख़तरनाक स्ट्रेप्टोकॉकी और स्टैफिलोकोकी होते हैं, जो दांतों में सड़न का कारण बनते हैं. कुछ अन्य जीव मसूड़ों में सूजन पैदा करते हैं, जिसे पेरियोडॉन्टल डिज़ीज़ कहा जाता है.”

शोधकर्ताओं को ऐसे बैक्टीरिया और फंगस भी मिले हैं जो सामान्यतः टूथब्रश पर नहीं होने चाहिए. जैसे- एस्चेरिशिया कोलाई, स्यूडोमोनास ऐरूजिनोसा और एंटरोबैक्टीरिया, जो पेट के संक्रमण और फूड पॉइज़निंग से जुड़े होते हैं.

अध्ययनों में क्लेब्सीएला न्यूमोनिए जैसे जीवाणु (जो अस्पतालों में संक्रमण का आम कारण है) और कैंडिडा यीस्ट (जो थ्रश नाम की समस्या पैदा कर सकता है) भी टूथब्रश पर पाए गए हैं.

ये सूक्ष्म जीव उस पानी से आ सकते हैं जिससे हम ब्रश धोते हैं, हमारे हाथों से या उस वातावरण से जहां ब्रश रखा होता है. अगर सोचें तो वह वातावरण ज़्यादातर मामलों में हमारा बाथरूम ही होता है.

बाथरूम गर्म और नम जगह होती है, जहां हवा में पानी की बारीक बूंदें यानी एरोसोल बनते रहते हैं. इन बूंदों के साथ बैक्टीरिया और वायरस हवा में फैल सकते हैं. मार्क-केविन ज़िन के अनुसार, इसी वजह से बाथरूम में रखे टूथब्रश जल्दी संक्रमित (कॉन्टेमिनेशन) हो जाते हैं.

ज़्यादातर लोग अपने बाथरूम में टॉयलेट भी रखते हैं और यहीं से मामला थोड़ा ख़राब हो जाता है.

हर बार जब आप टॉयलेट फ़्लश करते हैं, तो पानी और मल की सूक्ष्म बूंदें लगभग 1.5 मीटर (करीब पाँच फीट) तक हवा में फैल जाती हैं. इन एरोसोल जैसी बूंदों में बैक्टीरिया और संक्रामक वायरस भी हो सकते हैं, जैसे फ़्लू, कोविड-19 या नॉरोवायरस, जो उल्टी-दस्त जैसी बीमारियाँ पैदा करते हैं.

अगर आपका टूथब्रश टॉयलेट के पास रखा है, तो संभव है कि फ़्लश के बाद इन बूंदों के कण उसके रेशों पर बैठ जाएँ – वही रेशे जिन्हें बाद में आप अपने मुँह में डालते हैं. हालाँकि संक्रमण का अधिक ख़तरा फ़्लश करते समय सीधे साँस के ज़रिए होता है, फिर भी बेहतर होगा कि भविष्य में फ़्लश करने से पहले टॉयलेट सीट को ढक दें.

कॉमन बाथरूम में यह समस्या और बढ़ जाती है. एक यूनिवर्सिटी के शोध में पाया गया कि ऐसे बाथरूमों में रखे 60 फ़ीसदी छात्रों के टूथब्रश पर मल से जुड़े बैक्टीरिया मौजूद थे और कई बार एक व्यक्ति के ब्रश पर दूसरे के जीवाणु भी पहुँच जाते थे.

लेकिन अमेरिका में इलिनॉय की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर एरिका हार्टमैन, जो असल वातावरण में सूक्ष्म जीवों के जीवित रहने पर शोध करती हैं, कहती हैं कि टॉयलेट प्लूम को लेकर उतनी चिंता की ज़रूरत नहीं है जितनी अक्सर की जाती है.

उनके अध्ययन में इलिनॉय के लोगों से लिए गए 34 टूथब्रशों पर मल-संबंधी बैक्टीरिया अनुमान से बहुत कम पाए गए. हार्टमैन बताती हैं कि कई आंतों से जुड़े सूक्ष्म जीव हवा में आने के बाद ज़्यादा देर तक ज़िंदा नहीं रहते.

वह कहती हैं, “मुझे नहीं लगता कि ज़्यादातर लोग अपने टूथब्रश से बीमार पड़ते हैं.”

हालाँकि, कुछ शोध बताते हैं कि इन्फ़्लूएंज़ा और कोरोनावायरस जैसे वायरस टूथब्रश पर कई घंटों तक जीवित रह सकते हैं. हर्पीज़ सिम्प्लेक्स वायरस-1 तो 48 घंटे तक रह सकता है, जो छालों (कोल्ड सोर्स) का कारण बनता है.

यही वजह है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियाँ टूथब्रश साझा न करने की सलाह देती हैं. अगर एक ही जगह कई लोगों के टूथब्रश रखे जाते हैं, तो उन्हें एक-दूसरे से छूने से भी बचाना चाहिए- ख़ासकर तब, जब वे किसी और के हों जिनके साथ आप नहीं रहते.

लेकिन हार्टमैन का मानना है कि जो लोग साथ रहते हैं, उनके लिए यह उतनी बड़ी चिंता नहीं है.

वह कहती हैं, “साथ रहने वाले लोगों के मुँह में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवों में पहले से ही कई समानताएँ होती हैं. इसलिए मुझे नहीं लगता कि यह पास-पास रखे टूथब्रश की वजह से होता है बल्कि इसका ज़्यादा सीधा कारण है जैसे किसिंग या साझा चीज़ों का इस्तेमाल.”

दिलचस्प बात यह है कि टूथब्रश पर पाए जाने वाले कुछ वायरस हमारे लिए फ़ायदेमंद भी हो सकते हैं.

हार्टमैन और उनकी टीम ने पाया कि टूथब्रश पर बैक्टीरियोफ़ेज़ नाम के वायरस भी मौजूद होते हैं, जो इंसानों को नहीं बल्कि बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं और उनकी संख्या को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं.