February 5, 2026
VB–G RAM JI Bill Passed in the Lok Sabha:
Politics दिल्ली भारत

VB–G RAM JI Bill Passed in the Lok Sabha:

Dec 18, 2025

VB–G RAM JI Bill लोकसभा में पारित: ग्रामीण रोजगार और आजीविका पर सरकार का बड़ा दांव, विपक्ष ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली। ग्रामीण भारत में रोजगार और आजीविका को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं के बीच सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’, जिसे संक्षेप में वीबी–जी राम जी बिल कहा जा रहा है, गुरुवार को लोकसभा में पारित हो गया। सरकार इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की ओर एक निर्णायक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष ने इसे अधूरा और भ्रामक करार देते हुए वापस लेने की मांग की है।

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि यह कानून ग्रामीण बेरोजगारी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुरानी योजनाओं को नए नाम के साथ पेश कर रही है और इससे जनता को गुमराह किया जा रहा है।


क्या है वीबी–जी राम जी बिल?

वीबी–जी राम जी का पूरा नाम है —
विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)

सरकार के अनुसार यह मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के स्थायी स्रोत विकसित करने के उद्देश्य से लाया गया है। इसके तहत केवल मजदूरी आधारित काम नहीं, बल्कि कौशल विकास, उद्यमिता और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया गया है।

बिल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना, शहरों की ओर हो रहे पलायन को रोकना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।


सरकार का पक्ष: ‘विकसित भारत’ की नींव

ग्रामीण विकास मंत्री ने बिल पेश करते हुए कहा कि वीबी–जी राम जी मिशन ‘विकसित भारत’ विज़न का एक अहम स्तंभ है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल रोजगार देना नहीं, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है।

सरकार के अनुसार इस मिशन के तहत:

  • ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी
  • महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक और तकनीकी सहायता मिलेगी
  • कृषि के साथ-साथ गैर-कृषि क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
  • कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प और माइक्रो-एंटरप्राइज को बढ़ावा मिलेगा
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से रोजगार की निगरानी की जाएगी

सरकार का दावा है कि इससे मनरेगा जैसी योजनाओं को आधुनिक जरूरतों के अनुसार मजबूत किया जाएगा।


विपक्ष का विरोध: संजय सिंह का तीखा हमला

संजय सिंह ने कहा- ‘बिल को वापस लेना होगा’

बिल के पारित होते ही विपक्ष ने सरकार पर हमला तेज कर दिया। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा,

“यह बिल रोजगार की कानूनी गारंटी नहीं देता। यह सिर्फ नाम बदलकर पुरानी योजनाओं को पेश करने की कोशिश है। सरकार को यह बिल वापस लेना होगा।”

उन्होंने सवाल उठाया कि:

  • रोजगार की न्यूनतम गारंटी क्यों तय नहीं की गई?
  • बिल के लिए स्पष्ट बजट प्रावधान क्यों नहीं हैं?
  • राज्यों की भूमिका और जिम्मेदारी क्यों स्पष्ट नहीं की गई?

उनका कहना था कि अगर सरकार सच में ग्रामीण बेरोजगारी को खत्म करना चाहती है, तो उसे मनरेगा के तहत मजदूरी बढ़ानी चाहिए और काम के दिनों की संख्या बढ़ानी चाहिए।


अन्य विपक्षी दलों की आपत्तियां

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों ने भी इस बिल पर सवाल उठाए। कांग्रेस सांसदों ने कहा कि रोजगार की परिभाषा अस्पष्ट है और निजी क्षेत्र की भागीदारी के नाम पर ठेकेदारी व्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है।

वाम दलों ने आशंका जताई कि यह बिल कॉर्पोरेट हितों को प्राथमिकता देता है और इससे गरीब मजदूरों को अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा।


विशेषज्ञों की राय: अवसर भी, चुनौतियां भी

ग्रामीण अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों का मानना है कि वीबी–जी राम जी बिल में संभावनाएं भी हैं और जोखिम भी। प्रो. आर.के. मिश्रा के अनुसार,

“अगर इस मिशन को पंचायत स्तर तक ईमानदारी और पारदर्शिता से लागू किया गया, तो यह ग्रामीण भारत के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है।”

हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी चेताया कि मजबूत निगरानी तंत्र और पर्याप्त फंडिंग के बिना यह योजना कागजों तक सीमित रह सकती है।


युवाओं और महिलाओं पर विशेष फोकस

बिल में ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को केंद्र में रखा गया है। सरकार का दावा है कि:

  • युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगारपरक प्रशिक्षण मिलेगा
  • स्टार्टअप और छोटे व्यवसायों के लिए आसान ऋण की सुविधा होगी
  • महिला स्वयं सहायता समूहों को बाजार से जोड़ा जाएगा
  • डिजिटल साक्षरता और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा

इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


ग्रामीण पलायन पर असर

ग्रामीण इलाकों से शहरों की ओर पलायन लंबे समय से एक बड़ी समस्या रही है। सरकार का कहना है कि गांव में ही रोजगार मिलने से पलायन कम होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। हालांकि आलोचकों का कहना है कि जब तक स्थायी आय और रोजगार की ठोस गारंटी नहीं दी जाती, तब तक पलायन पर पूरी तरह अंकुश लगाना मुश्किल है।


बजट और फंडिंग को लेकर सवाल

विपक्ष ने बिल के वित्तीय ढांचे पर भी सवाल खड़े किए हैं। अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि:

  • इस मिशन के लिए कुल बजट कितना होगा
  • राज्यों पर कितना वित्तीय बोझ पड़ेगा
  • फंड का वितरण किस आधार पर किया जाएगा

विपक्ष का कहना है कि बिना ठोस बजट के यह कानून सिर्फ एक नीतिगत घोषणा बनकर रह जाएगा।


राज्यसभा में अगली परीक्षा

अब यह बिल राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां इस पर विस्तृत चर्चा और संशोधन की मांग उठ सकती है। यदि राज्यसभा से भी यह पारित हो जाता है, तो राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून का रूप ले लेगा।


निष्कर्ष

VB–G RAM JI Bill ग्रामीण भारत के लिए एक बड़ी पहल के रूप में सामने आया है। सरकार इसे रोजगार और आजीविका की गारंटी बता रही है, जबकि विपक्ष इसे अधूरा और भ्रामक मानता है। इस बिल की असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन में होगी। आने वाले वर्षों में ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह मिशन ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल पाएगा या नहीं।

Leave a Reply