भोपाल।
Wildlife Protection Drive: भारत में वन्यजीवन को बड़े खतरे से बचाने के लिए वन विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। चीतों और बाघों में फैलने वाले कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) को रोकने के लिए राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिज़र्व के आसपास रहने वाले पालतू और आवारा कुत्तों का बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा।
क्या है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस?
कैनाइन डिस्टेंपर वायरस एक खतरनाक संक्रामक रोग है जो—
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कुत्तों
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लोमड़ियों
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लकड़बग्घों
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और बड़े मांसाहारी जानवरों
को प्रभावित करता है।
यह वायरस अगर जंगल में फैल जाए तो चीतों और बाघों जैसी दुर्लभ प्रजातियों के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है।
टीकाकरण अभियान कैसे चलेगा?
वन विभाग और पशुपालन विभाग संयुक्त रूप से यह अभियान चलाएंगे।
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राष्ट्रीय उद्यानों की सीमाओं के पास बसे गांवों में टीम भेजी जाएगी
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सभी पालतू और आवारा कुत्तों की पहचान कर डिस्टेंपर वैक्सीन लगाई जाएगी
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गांवों में जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा
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टीकाकरण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा ताकि भविष्य में ट्रैकिंग आसान हो सके
चीतों और बाघों को क्यों है बड़ा खतरा?
विशेषज्ञों का कहना है कि—
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जंगलों के पास रहने वाले संक्रमित कुत्ते वन्यजीवों के संपर्क में आने पर वायरस फैला सकते हैं
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अफ्रीका और एशिया के कई देशों में CDV की वजह से बड़ी संख्या में वन्यजीवों की मौतें हुई हैं
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भारत में भी पिछले वर्षों में कुछ मामलों में बाघों की मौत के संभावित कारण के रूप में इस वायरस का संदेह जताया गया था
सरकार ने क्यों लिया यह निर्णय
चीतों के पुनर्वास प्रोजेक्ट और बाघ संरक्षण कार्यक्रम को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम जरूरी माना गया।
नीति आयोग और वन्यजीव विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद सरकार ने इसे तत्काल आवश्यक कार्रवाई बताया है।
स्थानीय प्रशासन की भूमिका
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कुत्तों का सर्वे
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वैक्सीनेशन कैंप
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ग्रामीणों को जागरूक करना
इन तीन स्तरों पर काम होगा।
पशु चिकित्सकों के अनुसार यह अभियान आने वाले कुछ महीनों में पूरा कर लिया जाएगा।
