March 23, 2026
Working System Change: कार्यकर्ताओं को मंत्रियों से मिलने के लिए बंगले या मंत्रालय के नहीं लगाने होंगे चक्कर
एमपी भोपाल

Working System Change: कार्यकर्ताओं को मंत्रियों से मिलने के लिए बंगले या मंत्रालय के नहीं लगाने होंगे चक्कर

Dec 2, 2025

भोपाल |

मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा और रणनीतिक परिवर्तन किया गया है। भाजपा ने संगठन और सरकार के बीच समन्वय को और मज़बूत करने के उद्देश्य से नई व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत अब प्रदेश के मंत्री सप्ताह में तय दिनों पर सीधे भाजपा के प्रदेश कार्यालय में बैठेंगे। इससे कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को मिलने के लिए पहले की तरह मंत्रालय, वीआईपी बंगले या सरकारी दफ्तरों में चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।पार्टी का दावा है कि यह निर्णय न केवल संगठन की पहुँच बढ़ाएगा, बल्कि कार्यकर्ताओं की शिकायतों और क्षेत्रीय मुद्दों के समाधान की गति भी बढ़ाएगा। कई वरिष्ठ नेताओं ने इसे “ग्राउंड लेवल पर सुनवाई की वापसी” करार दिया है।—🔹 क्यों लिया गया यह निर्णय?पिछले कुछ वर्षों में लगातार यह शिकायत मिल रही थी कि कार्यकर्ता मंत्रियों से मिलने के लिए लंबा इंतज़ार करते हैं, कई बार मंत्रालय या बंगलों के बाहर घंटों खड़े रहना पड़ता है।कुछ विधायकों और जिला अध्यक्षों ने भी संगठन को फीडबैक दिया था कि—”मंत्रियों तक पहुँचना मुश्किल होता जा रहा है””स्थानीय समस्याएँ समय पर नहीं सुनी जातीं””कार्यकर्ता उपेक्षित महसूस करते हैं”इन्हीं शिकायतों के बाद भाजपा संगठन ने यह निर्णय लिया कि मुख्यालय में नियमित बैठकों से न केवल संवाद बढ़ेगा, बल्कि राजनीतिक कार्यों में पारदर्शिता और गति आएगी।—🔹 प्रदेश कार्यालय में ‘जनसुनवाई मॉडल’ लागूनई व्यवस्था लगभग ‘जनसुनवाई मॉडल’ की तरह काम करेगी।हर मंत्री को सप्ताह में एक या दो दिन निर्धारित समय के अनुसार प्रदेश कार्यालय में उपस्थित रहना होगा।इस दौरान—कार्यकर्ता अपने क्षेत्र की समस्याएँ रख सकेंगेलंबित योजनाओं पर अपडेट ले सकेंगेट्रांसफर, प्रशासनिक मुद्दे, विकास कार्यों से जुड़े प्रस्ताव दे सकेंगेस्थानीय संगठनों की गतिविधियों की रिपोर्ट सीधे मंत्री को सौंप सकेंगेमुख्यालय में एक टीम भी तैनात की जाएगी जो समस्याओं को दस्तावेज़ बनाकर मंत्रालय तक फॉलोअप भेजेगी।—🔹 संगठन—सरकार तालमेल पर फोकसभाजपा लंबे समय से इस बात पर ज़ोर देती आई है कि सरकार और संगठन दो पहिए हैं और दोनों का तालमेल ही राजनीतिक मजबूती की असली कुंजी है।इस निर्णय के बाद—संगठन को सरकार पर बेहतर पकड़कार्यकर्ताओं को सीधे मंत्री से संवादजिलों से आने वाली समस्याओं की तुरंत सुनवाईमंत्रियों पर जवाबदेही बढ़ेगीसत्ता और संगठन के बीच दूरी कम होगीपार्टी सूत्रों का कहना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए भी मंत्री-कार्यकर्ता संबंध मजबूत करना आवश्यक था।—🔹 भीड़ कम करने और समय बचाने का भी उद्देश्यमंत्रालय और मंत्रियों के बंगलों पर अक्सर भारी भीड़ दिखाई देती थी, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी दबाव बनता था।कई बार आम नागरिक और पार्टी कार्यकर्ता एक साथ इकट्ठा हो जाते थे, जिनमें से अधिकांश को निराश लौटना पड़ता था।प्रदेश कार्यालय में बैठक की व्यवस्था से—सुरक्षा प्रबंधन आसान होगाभीड़ नियंत्रित रहेगीसमयबद्ध तरीके से सुनवाई हो सकेगीकार्यकर्ताओं का समय बचेगाभाजपा IT सेल और संगठन विभाग के लोग इस दौरान समस्या दर्ज कर डिजिटल रिकार्ड भी रखेंगे।—🔹 कार्यकर्ताओं में उत्साह—“अब बात सीधे मंत्री तक पहुँचेगी”निर्णय के बाद कई जिलों के कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आई है।एक वरिष्ठ मंडल अध्यक्ष ने कहा—“पहले 2 घंटे लाइन में लगकर भी मुलाकात मुश्किल होती थी। अब सीधे पार्टी कार्यालय में मंत्री से मिलना आसान होगा।”कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि इससे राजनीतिक दूरी खत्म होगी और ग्राउंड लेवल की समस्या ऊपर तक पहुँचेगी।—🔹 विपक्ष की प्रतिक्रियाकांग्रेस ने इसे लेकर तंज कसा है।कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा—“मंत्रियों ने मंत्रालय छोड़ दिया, अब पार्टी दफ्तर ही असली सरकार है।”भाजपा ने इस पर जवाब दिया कि यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत करती है और विपक्ष इसके सकारात्मक पहलू को समझना नहीं चाहता।

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