September 21, 2026
Hanumangarh Protest: किसानों का बवाल, दीवार तोड़ी, गाड़ियाँ जलाई : इलाके में इंटरनेट बंद
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Hanumangarh Protest: किसानों का बवाल, दीवार तोड़ी, गाड़ियाँ जलाई : इलाके में इंटरनेट बंद

Dec 11, 2025

Hanumangarh (हनुमानगढ़ )। टिब्बी – राठीखेड़ा में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन बुधवार को हिंसक हो गया, जब किसानों ने फैक्ट्री की दीवार तोड़ दी, पुलिस से भिड़ गए और कम-से-कम 14 गाड़ियाँ, सहित कुछ वाहनों में आग लगा दी। इस हिंसा में एक विधायक सहित दर्जनों लोग घायल हुए, और प्रशासन ने स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए इलाके में इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दीं।

स्थानीय किसान और ग्रामीण पिछले 15 महीने से उस 450 करोड़ रुपये लागत की एथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, जिसे वे अपनी जमीन, पेयजल और पर्यावरण के लिए खतरा मानते थे। बुधवार को एक “किसान महापंचायत” के बाद, भारी भीड़ रैली कर SDM ऑफिस से निकलकर फैक्ट्री साइट की ओर बढ़ी। परिवारों और किसानों की मांग थी कि निर्माण को तत्काल रोका जाए। जब प्रशासन ने लिखित गारंटी देने से इनकार किया, तो प्रदर्शनकारी ट्रैक्टरों से फैक्ट्री की चारदीवारी गिरा दी।

जैसे ही वे परिसर में दाखिल हुए, स्थिति तेजी से बिगड़ी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़े और पत्थरबाज़ी शुरू कर दी। इसके बाद कुछ वाहनों और मशीनरी को आग के हवाले कर दिया गया। सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा — पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया, ताकि भीड़ को खदेड़ा जा सके। झड़प में एक विधायक समेत कई लोग घायल हुए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

हिंसा के बाद प्रशासन ने नियंत्रण के उपाय किए: इंटरनेट बंद किया गया, स्कूल और दुकानों को बंद रहने का आदेश दिया गया, और क्षेत्र में भारी पुलिस तैनाती की गई। जिला प्रशासन ने कहा कि जिन लोगों ने आगजनी और तोड़फोड़ की है, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी — कोई भी कानून हाथ में नहीं ले सकता।

विरोध का आधार किसानों की चिंता है कि फैक्ट्री से भूमि और भूजल में प्रदूषण का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे खेती प्रभावित होगी। वे मांग कर रहे थे कि अगर फैक्ट्री बनाई ही जानी है, तो इसकी ज़मीन ऐसी हो जहाँ खेती या पेयजल पर असर न पड़े। कई स्थानीय लोग पहले भी विरोध कर चुके थे, लेकिन उनकी आवाज़ नहीं सुनी गई।

इस बवाल ने इलाके में भय और असुरक्षा की फीलिंग पैदा कर दी है। कई लोगों ने अपने घर छोड़ दिए, और आसपास के गांवों में लोग भय के कारण घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं।

अब प्रशासन और सरकार के सामने बड़ा सवाल है — विकास और उद्योग का दावा करने वाली फैक्ट्री बनाएं या किसान और ग्रामीण समुदाय की सुरक्षा व आजीविका का ख्याल रखें। वहीं, किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और तेज होगा।

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